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दिल में हिलोरे मार रहे अरमान को सांसद बलूनी ने दिए लफ्ज !

बोले, कोई भी भाजपा कार्यकर्ता बन सकता है मुख्यमंत्री, इच्छा जताने में क्या दिक्कत

राज्यपाल के ओएसडी से राज़्य सभा सांसद तक का तय़ कर चुके सफर

गुजरात राजभवन में रहते हुए मोदी और शाह से बनाए थे ताल्लुकात

हाईकमान से नजदीकी का इजहार करने का नहीं चूकते कोई मौका

संवाददाता 

नई दिल्ली। सांसद अनिल बलूनी ने अपने अंदाज में अपने दिल में पल रहे उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनने के अरमान को आखिरकार लफ्ज दे ही दिए। सोशल मीडिया में चल रही खबरों के बीच बलूनी ने कहा कि भाजपा का कोई भी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री बन सकता है। अगर दिल में इच्छा है तो उसका इजहार करने से परहेज क्यों?

भाजपा की तरह की सांसद बलूनी की भी अपनी एक साइबर टीम है। यह टीम उनके कामों और कार्ययोजनाओं का जमकर प्रचार करती है। कभी ”मेरा गांव मेरा वोट” अभियान को लेकर केंद्र में शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के साथ उऩकी फोटो वायरल की जाती हैं तो कभी पलायन जैसे मुद्दों को लेकर नीति आयोग, केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ फोटो नुमाया हो जाती हैं। इन सुर्खियों के बीच ही सोशल मीडिया पर अचानक बलूनी को नया मुख्यमंत्री प्रचारित करने की पोस्ट दिखाई देती हैं। कुछ दिनों पर बलूनी इस तरह की बात का खंडन करते हैं। लेकिन उनकी खंडन वाली पोस्ट पर मौजूदा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को बेकार साबित करने वाली पोस्ट का अंबार सा लग जाता है। बलूनी की तरफ से इस तरह की टिप्पणियों का कभी भी विरोध नहीं किया गया।

अब कुछ दिन शांत रहने के बाद बलूनी ने मीडिया से अपने दिल का अरमान साझा कर ही लिया। हल्द्वानी में मीडिया ने उनसे जब इस बाबत सवाल किया तो बलूनी ने बड़े सधे अंदाज में कहा कि भाजपा का कोई भी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री या मंत्री बन सकता है। अगर किसी की ऐसी इच्छा है तो इसका खुलासा करने में परहेज कैसा। इन लफ्जों से उन्होंने साफ कर दिया कि वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं।

राज्य हित के कथित प्रयासों का यह है सच 

केस न. 1- इतना ही नहीं उनके द्वारा दिल्ली में बैठकर किये जा रहे हवा हवाई प्रयासों की फेहरिस्त काफी लम्बी है बीते एक साल पहले उनके द्वारा दुगड्डा -हनुमंती के पास के एक पलायन की मार झेल रहे बौर गांव की हालत आज भी जस की तस है जबकि इस गांव के दिन बहुरे जा रहे हैं का उस  दौरान काफी हो -हल्ला मचाया जा रहा था। लेकिन इस गांव की तरफ देखने का उसके बाद कभी भी प्रयास नहीं किया गया और गांव आज भी पलायन पर आंसू बहा रहा है।  

केस न. 2 – मेरा गांव मेरा वोट को लेकर सोशल मीडिया में चर्चा पाने वाले बलूनी का एक सच यह भी है कि उन्होंने राज्य में भाजपा की सरकार के बनते ही अपनी शिक्षिका पत्नी को दिल्ली स्थित राज्य स्थानिक आयुक्त के दफ्तर में अटैच करवा डाला।  सवाल यह भी उठ रहा है कि अपने गांव  में अपना वोट बनवाने से आखिर फायदा क्या होगा ? चुनाव तो पांच साल बाद होते हैं अगर प्रवासी पांच बाद वोट देने के लिए अपने गांव आएंगे तो क्या इसे रिवर्स पलायन माना जा सकता है।  जाहिर है कि साइबर टीम के हवाले से किया जा रहा बलूनी का प्रचार उत्तराखंड प्रेम का नाटक भर ही कहा जायेगा। 

दरअसल, बलूनी की भाजपा हाईकमान पर अच्छी पकड़ है। उत्तराखंड मूल के सुंदर सिंह भंडारी को जब गुजरात का राज्यपाल बनाया गया तो भंडारी ने बलूनी को अपने साथ बतौर ओएसडी रखा। उस वक्त नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उसी दौर में बलूनी ने मोदी और अमित शाह ने राजभवन की दम पर नजदीकियां बढ़ा ली। इसी जोड़ी की दम पर बलूनी कोटद्वार विधान सभा सीट ने भाजपा का टिकट भी ले आए। यह अलग बात है कि वे चुनाव नहीं जीत सके। इसके बाद पिछले साल बलूनी को तमाम वरिष्ठ भाजपा नेताओं को दरकिनार करके राज्यसभा भेज दिया गया।

राज्य सभा सांसद बनने के बाद बलूनी अपने अंदाज में और साइबर टीम की दम पर लगातार सुर्खियों में ही रहे हैं। केंद्रीय मंत्रियों को एक खत लिखते तो मीडिया में वायरल होता है। फिर खत पर एक्शन होते ही फिर वायरल किया जाता है कि बलूनी की वजह से ही उत्तराखंड को लाभ हुआ है। अहम बात यह भी कई मामले ऐसे भी आएं, जिनके लिए पहल राज्य सरकार (मुख्यमंत्री या मंत्री) के स्तर पर हुई और नतीजे का श्रेय बलूनी के खाते में ले जाने के प्रयास किये गए। 

 

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