Home केसर के उत्पादन के अनुकूल है उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों की जलवायु...

केसर के उत्पादन के अनुकूल है उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों की जलवायु …

उत्तराखंड में भी आसानी से हो सकता है केसर

एक किलो का दाम एक लाख रुपये से अधिक
वर्तमान में अफगानिस्तान, ईरान सहित भारत के कश्मीर में केसर का उत्पादन होता है। इनमें कश्मीर क्षेत्र के केसर को दुनिया में उत्कृष्ट श्रेणी का माना जाता है। वर्तमान बाजार में कश्मीरी केसर एक लाख 20 हजार रुपया प्रति किलो से अधिक कीमत पर बिक रहा है। 

 उत्तराखंड में बड़ी आसानी से उगेगा केसर 

पिछले साल कारगिल से केसर के बीजों को लाया गया था। केसर शोध संस्थान कश्मीर द्वारा तैयार किया गया यह उच्च कोटी का केसर है। यहां उत्पादित केसर का रासायनिक विश्लेषण किया जाएगा।

जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि अलग अलग भू-भाग में उगाने से केसर के रासायनिक गुणों में कितना अंतर आता है।

संस्थान के इस प्रयोग से यह साफ हो गया है कि उत्तराखंड में बड़ी आसानी से केसर को उगाया जा सकता है।
ई. किरीट कुमार, राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के नोडल अधिकारी।

अल्मोड़ा। उत्तराखंड में केसर का उत्पादन बड़ी आसानी से हो सकता है। जीबी पंत संस्थान और लमगड़ा ब्लाक में दूसरे साल भी केसर का सफल उत्पादन होने से इस उत्तराखंड में केसर उत्पादन की संभावना को बढ़ा दिया है। इससे वैज्ञानिक भी यहां इसके अच्छे उत्पादन की संभावना बता रहे हैं।

संस्थान के अनुसार पिछले साल कारगिल लेह क्षेत्र से मिशन की एक परियोजना के तहत प्रायोगिक रूप से कुछ मात्रा में केसर बीज (बल्ब) अल्मोड़ा जीबी पंत संस्थान में लाए गए थे। संस्थान में अलग-अलग स्थानों विभिन्न मृदा व परिस्थितियों में इसके बीज को उगाया। पहले साल केसर के पुष्पों का सफलता पूर्वक उत्पादन भी हुआ। इस साल दूसरी बार भी इसका अच्छा उत्पादन हुआ है। पिछले साल की तुलना में इसके बीज और पुष्पों में दो से तीन गुनी वृद्धि देखी जा रही है। जबकि अमूमन दूसरे साल इसका बीज सफलतापूर्वक नहीं उग पाता है।

केसर के लिए उपयुक्त जलवायु …….

केसर की खेती मुख्यत: समुंद्र तल से 1500 से 2500 मीटर की उचाई के साथ ही इसे धुप एवं सूखे दोनों ही क्षेत्रो में ज्यादा पाया जाता है | और ठंडा एवं गिला मौसम पौधे के विकास को रोकता है | जिससे काफी फायदा होता है, और साथ ही फूल लगने की क्रिया को भी सुस्त कर देता है | जिसमे काफी अच्छी पराग बनती है |

कश्मीर के शेर-ए-कश्मीर विश्वविद्यालय के परियोजना प्रमुख डा. एमएच खान के मार्गदर्शन में उगाए गए केसर के उत्पादन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसी तरह प्रायोगिक तौर पर जिले के लमगड़ा क्षेत्र में भी दूसरे साल केसर का सफल उत्पादन हो रहा है। संस्थान ने आने वाले दिनों में विभिन्न क्षेत्रों के चयनित किसानों को इस कार्य के लिए प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई है जिसके तहत प्रायोगिक तौर पर उन्हें केसर के बल्ब उपलब्ध कराए जाएंगे।

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